दुनिया के 10 सबसे जानलेवा वायरस हिंदी में | Top 10 Deadliest Virus In The World In Hindi |

दुनिया के 10 सबसे जानलेवा वायरस हिंदी में | Top 10 Deadliest Virus In The World In Hindi |

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“Top 10 deadliest virus in the world in hindi” दुनियाभर के तमाम वैज्ञानिकों में यह बहस छिड़ी रहती है कि पृथ्वी का सर्वनाश किसी एलियन हमले के द्वारा होगा लेकिन आपको यह जानकर बहुत आश्चर्य होगा कि अगर पृथ्वी पर कभी कुछ अनहोनी होती है तो इस अनहोनी की जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ हम और सिर्फ मनुष्य प्रजाति ही होगी आपने हालिया में देखा होगा कि एक कोरोनावायरस ने पूरी पृथ्वी पर किस प्रकार का तांडव मचाया है इससे हम अंदाजा लगा सकते हैं कि पृथ्वी पर एलियन का हमला हो या ना हो अगर हम इसी प्रकार गलती करते रहे तो कभी ना कभी हमारे सामने ऐसे विचित्र प्राणी जीव आते रहेंगे जिनसे मानव प्रजाति को बहुत नुकसान होगा |

“Top 10 deadliest virus in the world in hindi” की इस सूची में हमने दुनियाभर में पाए जाने वाले ऐसे 10 जानलेवा वायरस की सूची तैयार की है जिनके फैलने से पलक झपकते ही हर जगह तबाही का मंजर बन सकता है आपकी जानकारी के लिए बता दी हमने कोरोनावायरस को सबसे अंतिम में रखा है क्योंकि यह भी सबसे ज्यादा फैल रहा है और इसकी जानकारी लगभग हर व्यक्ति तक पहुंच चुकी है इसी क्रिया में आपको यह भी जानना होगा कि हमारी धरती पर ऐसे और कौन से वायरस मौजूद हैं जिनसे हमारी जान को खतरा बना रहता है |

Top 10 deadliest virus in the world in hindi” की इस सूची में वायरस के मिलने का समय फैलने की रफ्तार खेलने का तरीका लक्षण और इसे कब खोजा गया था जिसके बारे में बताया है अगर आपको इससे ज्यादा जानकारी चाहिए तो आप कमेंट में बताइए हम इसके बारे में अलग-अलग आपको जानकारी उपलब्ध करा देंगे |

1. वायरस क्या होता है ?

वायरस एक प्रकार का सूक्ष्म जीव भी है जो मृत अवस्था में वायु में उपस्थित होता है जैसे ही यह किसी मनुष्य शरीर या किसी जानवर का शरीर मिलता है तो यह उसे अपना घर बना लेता है और अपनी संख्या को चंद सेकंड में दोगुनी तिगुनी रफ्तार से बढ़ाने लगता है इसके बढ़ने से बहुत से नुकसान होते हैं जैसे कि अभी हम कोरोनावायरस की महामारी में देख रहे हैं ऐसे ही बहुत से वायरस हमारे पृथ्वी पर मौजूद हैं जिनसे हमें बहुत खतरा है |

वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी पर सबसे पहला और अंत में रहने वाला जीव होगा तो वह सिर्फ वायरस या बैक्टीरिया होगा |

2. List of top 10 deadliest virus in the world in hindi |

Top 10 Deadliest Virus In The World In Hindi
Top 10 Deadliest Virus In The World In Hindi

1. मरबर्ग वायरस (The Marburg Virus) |

मरबर्ग वायरस दुनिया के सामने साठ के दशक में आया था | इस वायरस की खोज 1967 में की गई थी | जब इसने जर्मन शहरों मरबर्ग और फ्रैंकफर्ट और यूगोस्लाव राजधानी बेलग्रेड में अपना कहर बरपाया था| इसने वहां पर काम कर रहे श्रमिकों को अपना शिकार बनाया था |

यह वायरस दुनिया की सबसे खतरनाक वायरसिस में से एक है इसका नाम लहन नदी पर एक छोटे से शहर के नाम पर रखा गया | इस वायरस से व्यक्ति को रक्त स्रावी बुखार होता है यह वायरस इबोला की तरह ही श्लेष्मा झिल्ली, त्वचा और अंगों के रक्तस्राव का कारण बनता है। और इसकी मृत्यु दर 90 फीसद तक आंकी गई है |

मरबर्ग वायरस चमगादड़ की एक प्रजाति के संपर्क में आने से फैलता है |और इसका दूसरा फैलने का कारण असुरक्षित यौन संबंध और टूटी हुई त्वचा या शरीर से निकले तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से होता है

इस रोग में एक रक्त स्रावी बुखार देखने को मिलता है जिससे मानव शरीर में अंदरूनी रक्तस्राव होने लगता है जिसके कारण व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है |

इस वायरस को विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ ने खतरनाक वायरसिस की सूची में स्तर 4 में रखा है जैव सुरक्षा स्तर चार समतुल्य योगदान की आवश्यकता होती है के रूप में रेट किया गया है अमेरिका में, एनआईएच/नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज इसे श्रेणी ए प्राथमिकता रोगज़नक़ के रूप में सूचीबद्ध करता है और रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र इसे श्रेणी ए बायोटेरोरिज्म एजेंट के रूप में सूचीबद्ध करता है

2. इबोला वायरस (the Ebola virus) |

इबोला वायरस की सर्वप्रथम खोज 1976 में इबोला नदी के पास एक गांव में की गई थी इसी कारण इस वायरस का नाम इबोला वायरस रखा गया | इबोला विषाणु रोग (EVD) या इबोला हेमोराहैजिक बुखार (EHF) इबोला विषाणु के कारण लगने वाला अत्यन्त संक्रामक एवं घातक रोग है।

इबोला वायरस के पांच प्रकार पाए जाते हैं जिनके नाम अफ्रीका देश के कई देशों के नाव पर रखा गया जैसे सूडान, ताई वन, बुंडीबुग्यो और रेस्टन | यह इबोला वायरस “top 10 deadliest viruses on earth” सबसे खतरनाक वायरसिस की सूची में हमारे दूसरे नंबर पर आता है इस वायरस से होने वाली मृत्यु दरों का अंकन 90 फीसद तक किया गया है

यह वायरस वर्तमान में गिनी शेरा लियोन और लाइबेरिया और उससे आगे तक फैल गया है वैज्ञानिकों का मानना है कि यह उड़ने वाले जानवरों के जरिए शहरों में फैलता है इबोला वायरस वर्तमान में गंभीर बीमारी का रूप धारण कर चुका है |

इबोला वायरस से होने वाली मृत्यदर बहुत ज्यादा है इस से संक्रमित होने वाले 50% से 90% तक लोगों को बचाया नही जा पता है |
इस बीमारी से शरीर की अंदरूनी नसों में से खून बाहर बहना शुरू हो जाता है | जिससे अंदरूनी रक्तस्राव प्रारंभ हो जाता है और अंततः इस घातक रूप से रोगियों की मृत्यु हो जाती है इससे मरने वालों की संख्या 90 फीसद तक है |

इबोला वायरस मुख्यतः पसीने और लार से फैलता है या संक्रमित खून और मल के सीधे संपर्क में आने से इबोला वायरस फैलता है इसके अतिरिक्त इसके फैलाव का कारण यौन संबंध और इबोला से संक्रमित पाए जाने पर उनके शरीर को समुचित तरीके से नष्ट नहीं करना होता है | यह एक बहुत तेजी से फैलने वाला संक्रामक रोग है

इस बीमारी के लिए कोई विशिष्ट इलाज उपलब्ध नहीं है; संक्रमित लोगो को इससे बचने के लिए ओरल रिहाइड्रेशन थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है जिसमे थोडा सा मीठा और नमकीन पानी शामिल है |या इंट्रावेनस फ्लुड्स देना शामिल है।

इस वायरस से पीड़ित मरीज को बचाना बहुत ही मुश्किल होता है | क्योंकि इस वायरस की वजह से अंदरूनी अंगों में नसों में रक्त स्राव हो जाता है | जब यह अफ्रिका में पाया गया था तब 50 से 80 फीसद लोगों को इस से बचाया नहीं जा सका इस वायरस से बचाव ही इस वायरस का इलाज है इबोला वायरस को top 10 deadliest virus in the world in hindi हमने दूसरे नंबर पर स्थान दिया है

3. हंता वायरस (The Hantavirus virus) |

पलमोनरी सिंड्रोम को हंता वायरस कहा जाता है हंता वायरस कई प्रकार के वायरसिस का एक समूह है इसका नाम एक नदी के नाम पर रखा गया है |यह सबसे पहले 1950 में कोरियाई युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिकों में देखा गया था | इस बुखार के अंदर मुख्यतः देखा गया था कि इसके लक्षणों में फेफड़ों की बीमारी बुखार गुर्दों का फेल होना आदि शामिल है |

इस वायरस की पहचान डॉक्टर ब्रूस टेम्पेस्ट ने की थी | इसे मुख्यतः चार कोनों की बीमारी कहा जाता है जब वैज्ञानिकों ने इस बीमारी को चार कोनों का नाम दिया तो अमेरिका में स्थित इस नाम के स्थान को लोगों ने शापित करार दे दिया और इस नाम को एक कलंकित नाम के तौर पर भी देखा जाता है |

यह वायरस मनुष्यों में प्रत्यक्ष रूप से काटने या या वातित वायरस के संक्रमण द्वारा फैलता है यह वायरस प्राकृतिक जलाशय जैसे नदी तालाब में मूत्र और शोच या लार थूकने से फैलता है | हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (एचपीएस ) दो संभावित घातक सिंड्रोम्स में से एक है ज़ुनोटिक उत्पत्ति हंता वायरस इनमें ब्लैक क्रीक कैनाल वायरस (बीसीसीवी), न्यू यॉर्क ऑर्थोएंटवायरस (एनवाईवी), मोनोंघेला वायरस (एमजीएलवी), सिन नोमब्रे ऑर्थोएंथवायरस शामिल हैं।

4. बर्ड फ्लू (bird flu) |

एवियन इन्फ्लूएंजा जिसे अनौपचारिक रूप से एवियन फ्लू या बर्ड फ्लू के नाम से भी जाना जाता है | यह एक प्रकार का इन्फ्लूएंजा वायरस है जो पक्षियों में पाया जाता है |और यह वहां पर ज्यादा मिलता है जहां पर पोल्ट्री से मनुष्य का सीधा संपर्क होता है | पोल्ट्री के सीधे संपर्क से लोग संक्रमित हो सकते हैं।

बर्ड फ्लू के बहुत से प्रकार हैं जो समय समय पर दहशत का कारण बनते रहते हैं एक अनुमान के तहत यह माना गया है कि अगर यह मनुष्य में फेला तो 70% इसकी मृत्यु दर होगी | इस वायरस का स्ट्रेन H5N1 है इससे संक्रमित होने का खतरा उन लोगों को ज्यादा है जो सीधे पोल्ट्री से संपर्क में रहते हैं हालांकि इन्फ्लूएंजा ए पक्षियों के लिए अनुकूलित है |

यह व्यक्ति से व्यक्ति में नहीं फैलता हाल ही में हुए शोध से पता चला कि स्पेनिश फ्लू वायरस के जीन में हाल ही में इन्फ्लूएंजा वायरस में परिवर्तन हुआ है | जिससे इसके मनुष्य में फैलने की संभावना भी बढ़ गई है|

सबसे बड़ा जोखिम अत्यधिक रोगजनक एवियन इन्फ्लूएंजा (HPAI) है। बर्ड फ्लू स्वाइन फ्लू, डॉग फ्लू, हॉर्स फ्लू और मानव फ्लू के समान है, जो एक विशिष्ट मेजबान के लिए अनुकूलित इन्फ्लूएंजा वायरस के उपभेदों के कारण होने वाली बीमारी है। इन्फ्लूएंजा वायरस (ए, बी, और सी) के तीन प्रकारों में से, इन्फ्लूएंजा ए वायरस एक जूनोटिक संक्रमण है जिसमें लगभग पूरी तरह से पक्षियों में एक प्राकृतिक जलाशय होता है।

इस वायरस से सूअर और मनुष्य प्रभावित हो सकते हैं अगर यह वायरस मनुष्य और स्वरों में पहला तो यह अपना रूप बदलकर एक नया प्रकार बना सकता है | इस वायरस का सबसे खतरनाक रूप (HPAI) स्ट्रेन है जो H5N1 से भी ज्यादा घातक है बर्ड फ्लू H5N1स्ट्रेन पहली बार 1996 में चीन के गुआंगडोंग प्रांत में एक खेती किसान के पास वाले हंस के जोड़े से मिला था |

सन 2013 की शुरुआत में और 2017 के शुरुआत में डब्ल्यूएचओ विश्व स्वास्थ्य संगठन ने H7N9 के 916 मामलों की पुष्टि करी थी यह बर्ड फ्लू का एक स्ट्रेन है इसके साथ ही 2017 के अंदर चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य और परिवार नियोजन आयोग ने डब्ल्यूएचओ को ap7am लाइन से 106 संक्रमित मामलों की सूची दी थी जिसमें दिसंबर तक इससे मरने वालों की संख्या 35 हो गई थी आपको बता दें कि h7m कि मानव मामलों की संख्या इसी तरह अचानक वृद्धि हो रही है इसकी सूचना पिछले वर्ष जनवरी के दौरान डब्ल्यूएचओ ने दी थी |

5. जूनिन वायरस (The Junin virus) |

The Junin virus वायरस हमारी “top 10 deadliest virus in the world in hindi” की सूची में छठे नंबर पर आता है | इस वायरस का नाम जूनिन शहर के नाम पर रखा गया है इस शहर के आसपास संक्रमण के पहले मामले सन 1958 में सामने आए थे। इसकी खोज 1958 में अर्जेंटीना की मैमरेनावायरस वायरस की खोज के बाद की गई थी |इस वायरस का विस्तार अर्जेंटीना तक ही सीमित रहा इसने शुरुआती दौर में डेढ़ लाख वर्गमीटर हिस्से के अंदर ही अपना प्रकोप बरपा |

जूनिन वायरस अर्जेंटीना के रक्तस्रावी बुखार से जुड़ा है। वायरस से संक्रमित लोग ऊतक सूजन, सेप्सिस और त्वचा से खून बहने से पीड़ित होते हैं। समस्या यह है कि लक्षण इतने सामान्य लग सकते हैं इस बीमारी का पता लगान बेहद मुश्किल होता है |

जीनस मैमरेनावायरस का एक सदस्य, अर्जेंटीना के मैमरेनावायरस विशेष रूप से अर्जेंटीना रक्तस्रावी बुखार (एएचएफ) का कारण बनता है | AHF संवहनी, तंत्रिका संबंधी और प्रतिरक्षा प्रणाली को बुरी तरह प्रभावित करता है |

यह वायरस मनुष्य से मनुष्य में तभी फैलता है जब कोई मनुष्य संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आता है या उसकी मल मूत्र के संपर्क में आता है यह वायरस दूषित भोजन पानी के खाने पीने से होता है साथ ही संक्रमित व्यक्ति के मूत्र के कणों में यह पाया जाता है अगर कोई व्यक्ति संक्रमित मरीज के मल मूत्र के सीधे संपर्क में आता है या किसी व्यक्ति के खुले घाव में संक्रमित व्यक्तियों का सीधे से संपर्क होता है |

यह वायरस तेजी से फैलने लगता है इस वायरस से एक प्रकार का रक्त शराबी बुखार होता है जिसे यह एच एस एफ का कारण माना जाता है एएचएफ शहवानी तंत्रिका संबंधी और प्रतिरक्षा प्रणाली की गंभीर परिणामों में से एक है और इसकी मृत्यु दर 20 से 30 फीसद तक आंकी गई है |

6. क्रीमियन-कांगो (The Crimea-Congo fever virus) |

द क्रीमिया कांगो फीवर वायरस क्रीमिया कांगो फीवर वायरस हमारी “दुनिया के 10 सबसे जानलेवा वायरस इन हिंदी” की सूची में छठे नंबर पर आता है यह वायरस सर्वप्रथम 1940 के दशक में अफ्रीका में पाया गया था | साल 2013 में रूस तुर्की और उज्बेकिस्तान में 50 से अधिक मामले इस वायरस के पाए गए थे |

इस क्रीमियन-कांगो वायरस कास पता पहली बार 1940 के दशक में चला था। यह मछर के काटने से फैलता है | यह एक प्रकार का वायरल बीमारी है |

इस वायरस की मृत्युदर की बात करें तो इससे मृत्यु का जोखिम 10 से 40 फीसद तक रहता है CCHFV के सात जीनोटाइप के वायरस मिलते हैं अफ्रीका वन सेनेगल, अफ्रीका टू कांगो, अफ्रीका 3 दक्षिण और पश्चिम अफ्रीका, यूरोप वन अल्बानिया बलगारिया कोसोवो रूस और तुर्की, यूरोप टू ग्रीन एशिया वन मध्यपूर्व ईरान और पाकिस्तान एशिया टो चीन कजाकिस्तान ताजिकिस्तान उज्बेकिस्तान आदि यह सब देश के आधार पर रखे गये नाम है |

क्रीमियन कांगो हेमोरेजिक फीवर एक बीमारी है जिसके लक्षणों में बुखार मांसपेशियों में दर्द सिर दर्द उल्टी दस्त और त्वचा में से खून बहना शामिल होता है यह वायरस ही इबोला वायरस की तरह ही फैलता है यह वायरस बूचड़खाना में काम करने वाले अथवा वह किसान जो ज्यादातर पशुओं के संपर्क में रहते हैं उनमें देखने को मिलता है

इसका कोई टिका उपलब्ध नहीं है |

7. माचुपो वायरस (The Machupo virus) |

माचूपो वायरस दुनिया के सामने पहली बार सन् 1963 में काल जॉनसन के नेतृत्व में एरेनाविरिडे परिवार के एक सदस्य में पाया गया था इस वायरस से मृत्यु होने की दर 5 से 30% तक आंकी गई है | माचूपो वायरस को जानलेवा वायरस की श्रेणी में स्तर 4 पर रखा गया है | यह वायरस बोलीविया देश में पाया गया था इस वायरस ने 2003 के शुरुआती दिनों में 200 से अधिक लोगों को अपनी चपेट में लिया था जिसके अंदर 12 से 15 लोग गंभीर रोग से गंभीर रूप से इससे प्रभावित हुए थे |

माचूपो वायरस बोली भी आई अंतर रक्त सहावी बुखार है जिसे ब्लैक टाइफस के नाम से भी जाना जाता है | इस संक्रमण के कारण तेज बुखार होता है साथ ही बाहरी रक्तस्राव भी होता है यह जूनिन वायरस की तरह ही आगे बढ़ता है | यह वायरस मानव से मानव में आसानी से संक्रमण फैलाता है | बोलिवियन हेमोरेजिक फीवर (बीएचएफ) इसे ब्लैक टाइफस या ऑर्डॉग फीवर के रूप में भी जाना जाता है “top 10 deadliest virus in the world in hindi” की सूची में यह पहला जूनोटिक वायरस है जो जानवरों से मनुष्यों में फैलता है

जूनोटिक डिजीज क्या होती है ?

जानवरों और पक्षियों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियां को जूनोटिक डिजीज बोलते हैं। जूनोटिक डिजीज मनुष्यों के जंगल में हस्तक्षेप से फैलने का खतरा ज्यादा बाड जाता है |

8. the Kyasanur Forest Virus (KFD)

दी क्यासानूर फॉरेस्ट वायरस केएफडी यह वायरस 1955 में भारत के दक्षिणी तट पर स्थित जंगलों में खोजा गया था | क्यासानूर वायरस एक कीट द्वारा फैलता है | लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके फैलाव के लिए किसी भी वाहक को निर्धारित करना अभी मुश्किल है |

वैज्ञानिकों का यह मानना है कि क्यासानूर वायरस चूहे पक्षी और सूअर को अपना शिकार बनाता है |इस बीमारी से होने वाली मृत्यु का अंकन 3 से 10% माना गया है |

इससे हर साल 400 से 500 लोग प्रभावित होते हैं यह रोग भारत में कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले में सागर के पास क्यासानूर गांव में देखा गया था | इसी कारण इसका नाम क्यासानूर फॉरेस्ट फायरस भी रखा गया |
भारत के बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान (चामराजनगर) के कुछ हिस्सों और नीलगिरी के कुछ हिस्सों में बंदरों में इस वायरस का संक्रमण देखने को मिला था | जब इन बंदरों को सुरक्षाकर्मियों द्वारा संभाला गया तो यह वायरस बंदरों से मानव में संक्रमित हो गया |

जिससे इसके आसपास के राज्यों में फैलने का खतरा बढ़ गया | इस वायरस से होने वाले रोगों के लक्षणों में ललाट सिरदर्द के साथ तेज बुखार ठंड लगना मांसपेशियों में तेज दर्द उल्टी और अन्य जठरांत्र संबंधी लक्षण शामिल है |

इस वायरस से संक्रमित होने के 3 से 4 दिन बाद रक्तस्राव होने की संभावना उत्पन्न हो जाती है मरीजों को असामान्य रूप से रक्तस्राव होने लगता है कम प्लेटलेट्स और लाल रक्त कोशिकाओं और सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या के कम होने का अनुभव हो सकता है या एनीमिया भी हो सकता है इस वायरस से पीड़ित व्यक्तियों में देखा गया है कि व्यक्ति स्वतः ही 1 से 2 हफ्तों में ठीक हो जाता है हालांकि यह भी देखा गया है कि इस वायरस से संक्रमण से ठीक हो चुके व्यक्ति इसकी दूसरी लहर से भी प्रभावित होते हैं |

इस वायरस के संक्रमण से आए बुखार के कारण व्यक्ति के मांसपेशियों में लंबे समय तक दर्द भरा रहता है जिससे वह महीनों तक कमजोरी का एहसास करता है और किसी भी काम करने में असमर्थ हो जाता है

9.डेंगू बुखार (Dengue fever) |

डेंगू एक प्रकार का बुखार है जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद एक वैश्विक समस्या के रूप में दुनिया के सामने आया है |120 से अधिक देश इस बुखार से पीड़ित हैं और यह हर साल लगभग 40,00,000 लोगों की जान लेता है सन 2019 में डेंगू से पीड़ित मामलों में अचानक वृद्धि आई थी |

डेंगू बुखार एक मच्छर द्वारा फैलता है जिसे मादा एडिज मच्छर के नाम से जाना जाता है यह मच्छर अक्सर उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है यह अक्सर सुबह और शाम के वक्त लोगों को काटकर अपना शिकार बनाता है |

इस बुखार के लक्षणों में तेज बुखार सिर दर्द उल्टी मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द और एक विशिष्ट त्वचा के अंदर लाल चकत्ते होते हैं |आमतौर पर डेंगू से पीड़ित मरीज को 7 से 8 दिन ठीक होने में लगते हैं लेकिन जिस प्रकार से यह फैलता है वह एक समस्या है |

इस मच्छर के प्रकोप से दुनिया भर के 120 देश परेशान है जिनमें मुख्यत दक्षिण पूर्व एशिया दक्षिण एशिया और दक्षिण अमेरिका शामिल है इससे हर साल 390 मिलियन लोग संक्रमित होते हैं और 4000000 लोग मारे जाते हैं डेंगू का वायरस मच्छरों के द्वारा फैलता है और यह समुद्र तल से 1000 से 33 फुट तक की ऊंचाई पर भी पाए जाते हैं

इसका क्षेत्रफल अगर देखा जाए तो यह 35 डिग्री उत्तर से 35 डिग्री दक्षिणी अक्षांश के बीच रहने वाले लोगों को अधिक अपना शिकार बनाता है | डेंगू बुखार के लिए टीके को मंजूरी दे दी गई है और यह कई देशों में व्यावसायिक रूप से उपलब्ध भी है

10. COVID-19

कोरोनावायरस साल 2019 (COVID-19) एक संक्रामक रोग है जो गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम कोरोनावायरस 2 (SARS-CoV-2) के कारण होता है। सबसे पहले ज्ञात मामलों की पहचान दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहरमें हुई थी। उसके बाद यह बीमारी दुनिया भर में फैल गई है जो आज दुनिया भर के लोगों के लिए जान का विषय बना हुआ है |

कोरोनावायरस जिसने हाल ही में पूरी दुनिया में तांडव मचाया रखा है जिससे भारत सहित कई देश अभी तक जूझ रहे हैं | यह वायरस 2019 में चीन के वुहान शहर में पाया गया था | इस वायरस के फैलने की रफ्तार ऊपर के सभी वायरस से ज्यादा है | आप जानते होंगे कि इस वायरस के अभी तक कई वेरिएंट आ चुके हैं |

हालांकि इस वायरस के लिए कई देशों के संयुक्त प्रयास से वैक्सीन भी तैयार कर ली गई है |
लेकिन जिस प्रकार यह वायरस लोगों के बीच में फैला है और जिस प्रकार इसने हर देश को बुरी तरह से नस्तोनाबुत कर दिया है उससे हम यह अंदाजा लगा सकते हैं कि अगर कोई भी वायरस जीवाणु या विषाणु पृथ्वी पर अपना हमला करें तो उसके क्या परिणाम हो सकते हैं |

आज हमारे सामने दुनिया के कई देशों में होने वाले तबाही का मंजर सामने हैं हालांकि कोरोनावायरस की वैक्सीन बन गई है | लेकिन फिर भी इससे संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है | डब्ल्यूएचओ ने 2019 में इसे महामारी घोषित कर दिया था |

यह वायरस अपना रूप बदलने में बहुत ही माहिर है इस वायरस को सार्स वायरस की श्रेणी में रखा गया है इस वायरस से होने वाले रोगों में एक्यूट डेफिशियेंसी ब्रीदिंग सिंड्रोम या तीव्र स्वसन सिंड्रोम कोरोनावायरस 2 (SARS-CoV-2) के कारण होता है |

कोरोनावायरस की कोई भी प्रमुख लक्षण नहीं है इसके लक्षण आम बुखार खांसी सिर दर्द थकान सांस लेने में कठिनाई और गंध और स्वाद की कमी मुख्य है यह वायरस मनुष्य से मनुष्य में आसानी से हवा के जरिए फैलता है इसके अंदर हाल ही में एयरोसोल इफ़ेक्ट भी देखा गया है इस वायरस से होने वाली मृत्यु दर 2% आंकी गई है हालांकि 2% आंकने के बावजूद भी इस से ठीक होने की संभावना बहुत कम रहती है | इसके कारण मनुष्य को सांस लेने की परेशानी होने लगती है और यह मनुष्य के फेफड़ों को बुरी तरह से प्रभावित करके उन्हें खत्म कर देता है |

यह मनुष्य से मनुष्य में सास के कारण फैलता है हवा में उड़ने वाले कणों के कारण फैलता है खांसी या चीन में आने वाले कारणों से फैलता है किसी संक्रमित व्यक्ति की चूड़ी हुई वस्तु के किसी व्यक्ति के छू लेने से फैलता है इसका वायरस खुली हवा में भी जीवित रहने की क्षमता रखता है पूरी दुनिया के साइंटिस्ट इस वायरस से लड़ने के लिए टीके की निजात कर रहे हैं हालांकि इसका व्यक्ति बन गया है जो सिर्फ इस वायरस के लक्षणों को दबाने में काम करता है और अभी तक इस वायरस के खत्म करने की कोई संभावना देखी नहीं जा रही है

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